Friday, 19 November 2021

कारक के कितने भेद होते हैं उनके नाम लिखें? | Karak ke kitne bhed hote hain

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क्या आप जानते है कि कारक क्या होता है। karak ke kitne bhed hote hain अगर नहीं तो आप बिल्कुल सही जगह पर आये है। इस पोस्ट में हमें बताया है। कारक किसे कहते हैं? और इसके कितने प्रकार हैं ? कारक के आठ भेद कौन कौन से हैं? 
karak ke kitne bhed hote hain
जिस प्रकार से हिंदी व्याकरण में समास, संधि और पर्यायवाची शब्दों का महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उसी प्रकार हिंदी व्याकरण में karak chinh in hindi का भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 


इस पोस्ट में हम ये जानेंगे कि कारक क्या होते है। कारक के कितने भेद होते है। यहाँ पर हम कारक से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को उदाहरण सहित समझाने का प्रयास करेंगे। ताकि आपको Karak in hindi पूरी तरह से समझ में आ जाएं। 

Karak ke kitne bhed hote hain ( कारक की  परिभाषा)

जो संज्ञा या सर्वमान जिस रूप से वाक्य का संबंध किसी किसी दूसरे शब्दों  होता है। उसे कारक कहते है। 


साधारण शब्दों में कारक की परिभाषा समझे तो किसी किसी वाक्य में लिखे गए वे चिन्ह (ने,को,से आदि ) जो शब्दों में भी संबंध बनाने का काम करते है, उसे कारक चिन्ह या कारक कहा जाता है। 

karak ke kitne bhed hai ? 

नीचे कुछ सम्बन्ध स्थापित करने वाले कारक चिन्हों का उदाहरण दिया गया है। जिसके आप को clear हो जाएगा कि कारक चिन्ह किस प्रकार से दो वाक्यों के बीच सम्बन्ध स्थापित करते है। 

Example- राम "ने" रावण "को" बाण "से" मारा।
उपरोक्त उदाहरण में आप देख सकते है कि राम, रावण और मार शब्दों में कारक चिन्हों ( ने, को, से) द्वारा किस प्रकार से संबंध स्थापित हो रहा है।  अतः ये सब चिन्ह कारक चिन्ह के अंतर्गत आते है। 

karak kitne prakar ke hote hain उनके नाम 

सामान्यतः कारक के 8 भेद होते है कारक के भेद और उनके विभक्ति चिन्ह  निम्नलिखित है। 
भेद विभक्ति चिन्ह
कर्ता ने
कर्म को
करण से (द्वारा)
सम्प्रदान के लिए
अपादान से
सम्बन्ध का,की,के
अधिकरण में, पर
सम्बोधन हे, अरे
दोस्तों अपने ऊपर जाना है कि कारक कितने होते है तथा कारक के कितने भेद होते है। अब हम आगे जानेंगे 8 कारकों को परिभाषा और उदाहरण सहित। 

कर्ता कारक (karta karak ki paribhasha)

जब किसी वाक्य में लिखे शब्द से किसी क्रिया या कार्य करने का बोध होता है तो उसे कर्ता कारक कहते है। कर्ता वह होता है जो किसी क्रिया या काम को करता है। "ने" कारक चिन्ह कर्ता और काम क्रिया के बीच सम्बन्ध स्थापित करने का कार्य करता है। 

सदैव संज्ञा और सर्वनाम ही कर्ता होता है। और कर्ता का सम्बन्ध क्रिया से होता है।karta karak ka udaharan
  • राहुल ने Pubg खेला। 
  • आकाश ने साईकिल चलाया। 
  • राम ने पानी पिया।
  • सीता ने गाना गाया।
  • अंकित ने क्रिकेट खेला 
  • पवन ने खाना खाया। 
  • रवि ने एक फिल्म दिखा।
  • सोनम ने उसे मारा।
  • रोहित ने सब संभाल लिया।
  • कविता ने पूजा की।
  • बछड़े ने दूध पिया।
  • करण  ने डांस किया।
  • रोहन ने  डांस किया। 
  • शिवम ने शर को देखा। 
उपरोक्य उदाहरण में आप देख सकते है। कोई न कोई किसी काम को कर रहा है। अतः जो कार्य हो रहा है वह क्रिया है। तथा जो कार्य को कर रहा है वह क्रिया है। 

आपने देखा की कर्ता और क्रिया के बीच सम्बन्ध स्थापित करने के लिए "ने" कारक चिन्ह का प्रयोग किया गया है। लेकिन यह भूतकाल  की सकर्मक क्रिया होने पर ने  परसर्ग लगाया जाता है। 

कर्ता के साथ ने परसर्ग रहता है। लेकिन वही भूतकाल की अकर्मक किया के साथ परसर्ग नहीं लगाया जाता।  और भविष्य काल और वर्तमान काल में परसर्ग का उपयोग नहीं होता है जैसे-
  1. चंद्रदीप काम करता है। 
  2. अंकित स्कूल जा रहा है। 

कर्म कारक ( Karm karak ki paribhasha)

जब किसी वाक्य में क्रिया असर किसी व्यक्ति,वस्तु या किसी जीव पर पड़ता है तो वहा कर्म कारक का बोध होता है।  साधारण शब्दों में समझे तो आप कह सकते है कि किसी वाक्य में कर्ता जो कार्य करता है। जिस शब्द पर पड़ता है। वह कर्म कारक होता है। 
इसके उदाहरण निम्नलिखित है। 
  • सुन्दर ने बाल को मारा। 
  • श्याम से रमेश को मारा। 
  • दीपा ने रवि को मारा। 
  • रोहित को डराया गया।
  • राम ने सीता को पेंसिल दी।
  • मोहन ने कुत्ते को मारा।
  • जानवरों को सताया गया।
  • रवि ने सोहन को मारा।
  • टीचर ने वीरेन्द्र को मारा। 
  • महेंद्र ने रवि को धोखा दिया।
  • कागजों को जला दिया गया।
  • ऑफिसर को पद से हटा दिया गया।
उपरोक्त उदाहरण में आप देख सकते है कि हर उदाहरण में कोई कार्य हो रहा है। इसमें जो कार्य कर रहा है। वह कर्ता है, और को कार्य हो रहा है वह कर्म है। 
जैसा कि आप जानते है "को" कर्म कारक की विभक्ति होता है। इसलिए कर्म कारक के साथ "को" लिखा जाता है। 

लेकिन हर वाक्य  होता है, कभी कभी किसी वाक्य में "को" को बिना लिखे ही क्रिया का प्रभाव कर्म पर होता है।  जैसे-
  1. उसे मारा गया। 
  2. उन्हें पीटा गया। 

करण कारक (Karan karak ki paribhash)

जिस भी किसी वाक्य में क्रिया किये जाने पर जिस किसी साधन की आवश्यकता होती है। उसे करण कारक कहा जाता है। आसान शब्दों कहे हो जब किसी कार्य को करने में जिस साधन का प्रयोग किया जाता है। उसे हम करण कारक कहते है। 

जैसे- राहुल ने विकास को डंडे से मारा। 
यहाँ पर राहुल कर्ता है जो विकास को मारने के लिए डंडे का प्रयोग कर रहा है। इसमें इससे यह पता चलता है कि राहुल को क्रिया करने के लिए डंडे का सहारा लेना पड़ रहा है। तो इसमें डंडा करण कारक है। 
karan karak ke udaharan निम्नलिखित है। 
  • राहुल ने गेंद को बैट से मारा। 
  • सोहन ने खाना चम्मच से खाया। 
  • रवि ने मोहन को डंडे से मारा।
  • महेंद्र ने कांच को डंडे से तोडा। 
  • सोहन ने अपने दोस्त को गाड़ी से पहुंचाया।
  • उसने टॉर्च से रोशनी दिखाई।
  • वह सीढ़ी से छत पर पहुंचा।
  • रवि ने सेब को चाकू से काटा। 
  • गीता ने माचिस से आग लगाई।
  • सोनू ट्रेन से गया था।
  • सोहन ने मोबाइल से फोन किया था।
  • शिकारी ने बंदूक से हिरण को मारा।
ऊपर दिए गए उदाहरण में आप देख सकते है। कर्ता कोई कार्य कर रहा है तो उसमे किसी ना किसी साधन का प्रयोग किया गया है। उसे हम करण कारक कहते है। इसका विभक्ति चिन्ह "से" होता है। 

सम्प्रदान कारक ( Sanpradan karak ki paribhasha)

किसी वाक्य में कर्ता द्वारा किसी दूसरे के लिए जब कार्य किया जाता है तो वहाँ सम्प्रदान कारक होता है। यानि कर्ता जिसके लिए कार्य कर रहा होता है उसे सम्प्रदान कारक कहते है।     
नीचे सम्प्रदान कारक के उदाहरण दिया गया है जिससे आप इसे आसानी से समझ सकते है। 
  • रवि महेंद्र के लिए वहां गया।
  • रवि ने गीता के लिए स्कूल छोड़ा। 
  • सोहन से अमन के लिए पुस्तक ख़रीदा 
  • सोहन ने मोहन के लिए शर्ट खरीदी।
  • उन्होंने अपने बेटे के लिए कार खरीदी।
  • वे सारे रवि के लिए गा रहे थे।
  • सीता ने गीता के लिए चाय बनाई।
  • सोहन अपने भाई के लिए computer लाया। 
  • गंगा ने अपनी पत्नी के लिए साड़ी ख़रीदा। 
  • राम मोहन के लिए मिठाई लाया।
  • हलवा राहुल के लिए बनाया गया था।   
उपरोक्त सभी उदाहरण में देख सकते है कि कर्ता किसी और  कार्य कर रहा है। इसमें कर्ता जिसके लिए कार्य कर रहा है, उसे सम्प्रदान कारक कहते है। इसकी विभक्ति "के लिए" होता है। 

अपादान कारक ( Apadan karak ki paribhash)

इसमें जब संज्ञा के जिस रूप से किसी वाक्य में एक दूसरे से अलग होने का बोध होता है। यानि जब भी कोई चीज़ किसी चीज़ से अलग होता है। तो वह पर अपादान कारक होता है। इसकी विभक्ति चिन्ह "से" होती है। जिससे अलग होना उसका बोध कराती है। 

इसके अतिरिक्त जहा भी " ले जाने, निकलने, सीखने, तुलना करना, डरना" में भी अपादान कारक का बोध होता है। इसके उदाहरण निम्नलिखित है। 
  • फ्रेम से फोटो गिर गया।
  • सोहन मुंबई से आया 
  • रोहन छत से गिरा 
  • पेड़ से सेब गिरा 
  • ईट दीवार से गिरी।
  • बाइक से हैंडल टूट गया।
  • दिल्ली आगरा से दूर है।
  • पेड़ से पत्ता गिर गया।
  • आकाश टंकी से पानी लाया 
  • छात्र अध्यापक से सीखते हैं।
  • सूरज पूर्व से निकलता है।
  • आम पेड़ से गिरा।
  • वह रोहन से चालाक है।
उपरोक्य उदाहरण में देख सकते है कोई वस्तु किसी चीज़ से अलग हो रहा है। अतः यह अपादान कारक है। 

संबंध कारक (sambandh karak ki paribhasha )

किसी दो शब्दों के बीच का सम्बन्ध का बोध होता है। जब किसी वाक्य में जिस किसी भी रूप से दो संज्ञा के बीच सम्बन्ध स्थापित का बोध हो उसे सम्बन्ध कारक कहते है। सम्बन्ध कारक का विभक्ति चिन्ह "का,की, के" होता है। 
  • यह अंकित का पेन है 
  • वह सीता की किताब है 
  • वह माया की नगरी है 
  • वह मेरी दुनिया है।
  • यह हमारे खिलौने हैं।
  • वह राधा की माँ है 
  • वे सब राम की गाये है 
  • यह सीता की गाय है।
  • यह उनके कपड़े हैं।
  • यह मेरा घर है।
  • यह राम की बाइक है।
  • यह रवि की साईकिल है 
  • आप मेरे मेहमान हैं।
  • राम मोहन का भाई है।
आप इन उपरोक्त उदाहरण में देख सकते है कि दो शब्दों के बीच में सम्बन्ध है अतः ये सम्बन्ध कारक कहलाएगा। 

अधिकरण कारक (adhikaran karak ki paribhasha)

अधिकरण का अर्थ होता है आश्रय। जिस वाक्य में संज्ञा का वह रूप जिससे क्रिया के आधार का बोध हो उसे अधिकरण कारक कहा जाता है। अधिकरण कारक की विभक्ति "में,पर" है। इसमें  (भीतर, अंदर, ऊपर, बीच) का प्रयोग किया जाता है। 
  • आकाश में तारा है। 
  • जंगल में शेर रहता है। 
  • मछली पानी में रहती है।
  • चिड़िया आकाश में उड़ती है।
  • वीरेंद्र छत पर टहल रहा है। 
  • ट्रेन में बहुत भीड़ होती है। 
  • पुस्तकालय में किताब है। 
  • राम युद्ध में मारा गया।
  • जब मैं रूम में गया तो कमरे में अंधेरा था।
  • मेले में आइसक्रीम मिलती है।
  • मंदिर में भगवान है। 
  • रामशंकर पेड़ पर चढ़ा है। 
उपरोक्त उदाहरण में आप देख सकते है कि किसी कार्य को होने में कोई न कोई आधार दिया गया है। इसे आश्रय भी कह सकते है। यही आधार अधिकरण कारक होता है। 

karak ke kitne bhed hote hain ( कारक के कितने भेद है।)

दोस्तों आप आगे की लेख में कारक के कितने भेद होते है। उसका 8वा भेद के बारे में जानने वाले है। मुझे आशा है की आपको कारक के भेद और उनके उदाहरण अच्छी तरह से समझ में आ रहा होगा। तो चलिए आगे की लेख को पूरा करते है। 

सम्बोधन कारक (sambodhan karak ki paribhasha)

जब वाक्य में किसी विशेष शब्द द्वारा किसी को सम्बोधन के लिए प्रयोग किया जाता है। उसे सम्बोधन कारक कहते है। इसका विभक्ति चिन्ह "हे,अरे" होता है। इसमें अजी, अहो आदि चिन्ह का प्रयोग भी किया जाता है। और इनके बाद "!" का चिन्ह भी लगा रहता है। 

इसके उदाहरण निम्नलिखित है। 
  • अजी! सुनो कहां जा रहे हो?
  • अजी ! सुनो खाना खा लो 
  • अजी! सुनते हो!  यहां  आओ।
  • अजी ! मार्केट से सामान लाना है 
  • अरे! यार तुम कहा थे 
  • अरे ! तुम अभी को आ रहे हो 
  • अरे! तुम यहां आओ।
  • हे गोपाल! क्या तुम मेरा एक काम करोगे?
  • हे ! भगवान मुझे पास करा दो 
  • हे ! राम उसके साथ ठीक नहीं हुआ 
  • हे भगवान! इसे ठीक कर दो.
  • अहो! वहां मत  जाओ।
ऊपर दिए गए वाक्यों में आप देख सकते है। कि किसी को सम्बोधित करने के लिए (हे, अरे, अहो, अजी) शब्दों की प्रयोग किया गया है। इसे ही सम्बोधन कारक कहा जाता है। 

[Karak in Hindi से संबधित पूछे गए अन्य सवाल। ]

karak meaning in english

उत्तर-  कारक का English meaning Factor होता है। 

Sanskrit mein kitne karak hote hain

उत्तर- दोस्तों संस्कृत भाषा में भी 8 कारक होता है। 

  • कर्ता प्रथमा -- कार्य को करनेवाला
  • कर्म द्वितीया -- जिस पर कार्य का प्रभाव पड़े
  • करण -- जिसके द्वारा कर्ता कार्य करता है
  • संप्रदान -- जिसके लिए कार्य किया जाए
  • अपादान -- जिससे अलगाव हो
  • सम्बन्ध -- अन्य पदों से संबंध
  • अधिकरण -- कार्य का आधार
  • संबोधन -- किसी को संबोधित करना 
दोस्तों अगर आपको कारक याद करने में कठिनाई होती है तो आप नीचे दिए गए पद को याद कर सकते है जिसमे कारक और उनके विभक्ति चिन्हों को मिलाकर एक पद की रचना किया गया है। जो आपको स्मरण करने में लाभकारी साबित हो सकते है। 

कर्ता ने अरु कर्म को, करण रीति से जान।
संप्रदान को, के लिए, अपादान से मान।।
का, के, की, संबंध हैं, अधिकरणादिक में मान।
रे ! हे ! हो ! संबोधन, मित्र धरहु यह ध्यान।।

आपने क्या सीखा ?
दोस्तों यहाँ पर आपने जाना karak ke kitne bhed hote hain और कारक कितने प्रकार के होते है। karak ki paribhasha क्या होता है। 

तो दोस्तों मुझे आशा है कि आपको यह जानकारी जरूर पसन्द आयी होगी।अगर आपको Karak in Hindi से संबंधित कोई भी समस्या हो तो कमेंट में जरूर बताएं। यदि यह जानकारी आपके लिए useful लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें। 
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